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Lok Sabha Elections 2024: सुप्रीम कोर्ट ने एग्जिट पोल पर दायर याचिका को किया खारिज

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Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 के एग्जिट पोल को लेकर काफी हंगामा मचा। इस मुद्दे ने इतना तूल पकड़ा कि सुप्रीम कोर्ट में एग्जिट पोल के खिलाफ एक याचिका दायर की गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को राजनीतिक स्वार्थ की याचिका बताते हुए सुनवाई करने से इंकार कर दिया है।

Lok Sabha Elections 2024: सुप्रीम कोर्ट ने एग्जिट पोल पर दायर याचिका को किया खारिज

मीडिया हाउसों के खिलाफ जांच की मांग

याचिका में चुनावों के अंतिम चरण के समाप्त होने के तुरंत बाद एग्जिट पोल के प्रसारण के लिए मीडिया हाउसों और उनके सहयोगियों/कंपनियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार पहले ही चुन ली गई है। अब चुनावों के दौरान जो भी हुआ, उसे रोककर देश में शासन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से इसे राजनीतिक स्वार्थ की याचिका बताते हुए इसे खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावों के परिणामों और मीडिया रिपोर्टिंग पर कानूनी नियंत्रण या हस्तक्षेप की संभावना नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि राजनीतिक स्वार्थ की याचिकाओं पर समय बर्बाद करने की बजाय, सरकार को शासन में सुधार की दिशा में काम करना चाहिए।

पारदर्शिता और निष्पक्षता पर ध्यान

एग्जिट पोल के प्रसारण के समय पर उठे सवालों के बीच, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। कोर्ट ने मीडिया हाउसों की भूमिका और एग्जिट पोल के प्रभाव के संदर्भ में यह भी सुझाव दिया कि चुनावी प्रक्रिया के बाद के विवादों को गंभीरता से देखना आवश्यक है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने एग्जिट पोल के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर यह स्पष्ट कर दिया कि अदालतें राजनीतिक स्वार्थ की याचिकाओं को प्राथमिकता नहीं देंगी। अब सरकार और चुनाव आयोग के लिए यह जरूरी है कि वे चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखें और देश के शासन की दिशा में प्रभावी कदम उठाएं। इस समय, नागरिकों और मीडिया को भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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